Best Health Insurance Company in India

Inflammatory Bowel Disease in Hindi: क्या है और इसके लक्षण

11 December, 2025

8 Shares

556 Reads

Inflammatory Bowel Disease in Hindi

आजकल पेट की बीमारियां बहुत आम हो गई हैं। कुछ लोग तो सालों तक दर्द, दस्त और थकान झेलते रहते हैं, लेकिन पता नहीं चलता कि असल समस्या क्या है। ऐसी ही एक गंभीर बीमारी है इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज। इसे हिंदी में सूजन वाली आंत की बीमारी कहते हैं। इस लेख में हम इसी के बारे में विस्तार से बात करेंगे। आप समझ पाएंगे कि Inflammatory Bowel Disease in Hindi को आसान भाषा में क्या कहते हैं, यह होती कैसे है, इसके लक्षण क्या हैं और इसे कैसे पहचानें।

 

इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज (IBD) क्या है?

 

इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज दो मुख्य बीमारियों का समूह है - क्रोहन डिजीज और अल्सरेटिव कोलाइटिस। दोनों में आंतों में लंबे समय तक सूजन रहती है। यह सूजन इम्यून सिस्टम की गड़बड़ी की वजह से होती है। हमारा इम्यून सिस्टम अच्छे बैक्टीरिया को भी दुश्मन समझकर हमला करने लगता है। नतीजा यह होता है कि आंत की दीवारें खराब हो जाती हैं।

क्रोहन डिजीज मुंह से गुदा तक पाचन तंत्र के किसी भी हिस्से को प्रभावित कर सकती है, लेकिन ज्यादातर छोटी आंत के आखिरी हिस्से और बड़ी आंत को नुकसान पहुंचाती है। अल्सरेटिव कोलाइटिस सिर्फ बड़ी आंत और मलाशय को ही प्रभावित करती है। दोनों बीमारियां जीवनभर रहती हैं, लेकिन दवाओं और इलाज से इन्हें कंट्रोल किया जा सकता है।

 

Inflammatory Bowel Disease in Hindi: इसे समझने की जरूरत क्यों है?

 

भारत में पिछले 10-15 सालों में IBD के मरीज तेजी से बढ़े हैं। पहले यह बीमारी पश्चिमी देशों में ज्यादा थी, लेकिन अब हमारे देश में भी हर साल हजारों नए केस सामने आ रहे हैं। खासकर शहरों में रहने वाले युवाओं को यह समस्या ज्यादा हो रही है। वजह है खान-पान में बदलाव, तनाव और जेनेटिक कारण। इसलिए Inflammatory Bowel Disease in Hindi में जानकारी होना जरूरी है ताकि शुरुआत में ही पहचान हो जाए।

मुख्य लक्षण जो आपको अलर्ट कर सकते हैं

हर मरीज में लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं। कुछ को हल्के लक्षण रहते हैं, कुछ को बहुत तेज। लेकिन कुछ आम लक्षण हैं जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

पेट में बार-बार दर्द और ऐंठन

यह सबसे आम लक्षण है। दर्द पेट के निचले हिस्से में या पूरे पेट में हो सकता है। खाना खाने के बाद या रात में दर्द बढ़ जाता है।

बार-बार दस्त लगना

एक दिन में 5-10 बार पॉटी जाना आम बात हो जाती है। कई बार खून या मवाद भी आता है। रात में भी नींद खुल जाती है पॉटी के लिए।

वजन कम होना और भूख न लगना

शरीर को पोषण नहीं मिल पाता क्योंकि आंत सही से खाना सोख नहीं पाती। मरीज धीरे-धीरे कमजोर पड़ने लगता है।

थकान और कमजोरी

हर समय थकान रहती है। सीढ़ियां चढ़ना भी मुश्किल लगता है। खून की कमी (एनीमिया) भी हो जाती है।

जोड़ों में दर्द और त्वचा की समस्या

कई मरीजों को घुटनों, कोहनी में दर्द रहता है। मुंह में छाले या त्वचा पर लाल चकत्ते भी दिख सकते हैं।

बच्चे में ग्रोथ रुक जाना

अगर बच्चों को यह बीमारी हो जाए तो उनकी लंबाई और वजन बढ़ना रुक जाता है। यह बहुत चिंता की बात है।

 

क्रोहन डिजीज और अल्सरेटिव कोलाइटिस के लक्षणों में फर्क

 

दोनों बीमारियां मिलती-जुलती हैं, लेकिन कुछ अंतर भी हैं। नीचे एक टेबल में साफ अंतर दिया गया है:

 

लक्षण / विशेषता

क्रोहन डिजीज (Crohn's Disease)

अल्सरेटिव कोलाइटिस (Ulcerative Colitis)

प्रभावित हिस्सा

मुंह से गुदा तक कहीं भी, अक्सर छोटी आंत का आखिरी हिस्सा

सिर्फ बड़ी आंत और मलाशय

सूजन का प्रकार

पूरे दीवार में गहरी सूजन, छाले बनते हैं

सिर्फ अंदरूनी सतह पर सूजन और अल्सर

पॉटी में खून

कभी-कभी

ज्यादातर हर बार

गुदा के आसपास फिस्टुला/फोड़ा

आम है

बहुत कम होता है

आंत में सिकुड़न

हो सकती है

नहीं होती

धूम्रपान का प्रभाव

धूम्रपान करने वालों को ज्यादा खतरा

धूम्रपान करने वालों को कम खतरा

 

कब डॉक्टर के पास जाना जरूरी है?

 

अगर आपको एक महीने से ज्यादा समय तक निम्न में से कोई भी लक्षण हैं तो तुरंत गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट से मिलें:

जितनी जल्दी जांच होगी, उतना इलाज आसान रहेगा।

 

कैसे पता चलता है कि IBD है?

 

डॉक्टर सबसे पहले ब्लड टेस्ट करते हैं। उसमें इन्फेक्शन और एनीमिया देखते हैं। कैलप्रोटेक्टिन टेस्ट पॉटी से होता है जो आंत में सूजन का पता देता है। फिर कोलोनोस्कोपी सबसे जरूरी जांच है। इसमें कैमरे वाली पतली ट्यूब गुदा से डालकर पूरी बड़ी आंत देखी जाती है और जरूरत पड़े तो बायोप्सी भी लेते हैं।

 

इलाज क्या है?

 

IBD का पूरा इलाज अभी तक नहीं है, लेकिन इसे पूरी तरह कंट्रोल किया जा सकता है। दवाइयां तीन तरह की होती हैं:

  1. सूजन कम करने वाली (5-ASA ग्रुप)
  2. इम्यून सिस्टम को दबाने वाली (इम्यूनोमोड्यूलेटर्स)
  3. बायोलॉजिकल दवाएं (इंजेक्शन वाली)

कई मरीजों को स्टेरॉयड भी देने पड़ते हैं। अगर दवा से कंट्रोल न हो तो सर्जरी करनी पड़ती है। अल्सरेटिव कोलाइटिस में कई बार पूरी बड़ी आंत निकाल दी जाती है। क्रोहन में सिर्फ खराब हिस्सा ही निकाला जाता है।

 

खान-पान और लाइफस्टाइल में बदलाव

 

क्या खाएं और क्या न खाएं - यह हर मरीज के लिए अलग होता है। फिर भी कुछ सामान्य सलाह:

  • दूध-दही कम करें अगर लैक्टोज इनटॉलरेंस हो गया हो
  • ज्यादा फाइबर वाली चीजें (जैसे गोभी, ब्रोकली) जब दस्त ज्यादा हों तो कम करें
  • छोटे-छोटे मील लें दिन में 5-6 बार
  • पानी खूब पिएं
  • तनाव कम करें, योग और मेडिटेशन करें
  • धूम्रपान बिल्कुल छोड़ दें

 

गर्भावस्था और IBD

 

ज्यादातर महिलाएं जिनका IBD कंट्रोल में है, वे नॉर्मल प्रेग्नेंसी कर सकती हैं और नॉर्मल डिलीवरी भी हो सकती है। बस दवाइयों की सलाह डॉक्टर से लेनी होती है। बीमारी एक्टिव होने पर थोड़ा रिस्क बढ़ जाता है, इसलिए प्लानिंग जरूरी है।

 

निष्कर्ष

 

इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज एक गंभीर लेकिन कंट्रोल करने योग्य बीमारी है। अगर समय रहते पहचान हो जाए और सही इलाज चालू हो तो ज्यादातर लोग नॉर्मल जिंदगी जी सकते हैं। पढ़ाई, नौकरी, शादी - सब कुछ हो सकता है। बस नियमित दवा और डॉक्टर की सलाह माननी पड़ती है। आजकल अच्छी हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी लेना भी समझदारी है क्योंकि इलाज महंगा पड़ सकता है। Niva Bupa की हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी क्रॉनिक बीमारियों को भी अच्छे से कवर करती है। अगर आप अभी तक अनइंश्योर्ड हैं तो एक बार चेक जरूर करें।

 

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (People Also Ask)

 

क्या IBD और IBS एक ही है? 

नहीं। IBS (इरिटेबल बाउल सिंड्रोम) में कोई सूजन नहीं होती, सिर्फ आंत की गतिविधि में गड़बड़ी होती है। IBD में सूजन और अल्सर होते हैं।

 

क्या यह बीमारी कैंसर का कारण बन सकती है? 

लंबे समय तक अल्सरेटिव कोलाइटिस रहने से कोलन कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए हर 1-2 साल में कोलोनोस्कोपी करवानी चाहिए।

 

क्या IBD संक्रामक है? 

नहीं। यह किसी को छूने या साथ खाना खाने से नहीं फैलती।

 

क्या दही और छाछ खा सकते हैं? 

ज्यादातर मरीज खा सकते हैं। कई बार यह फायदेमंद भी होता है क्योंकि इसमें प्रोबायोटिक्स होते हैं।

 

बच्चे को यह बीमारी हो सकती है? 

हां। भारत में 10-15% मरीज 18 साल से कम उम्र के होते हैं।

 

क्या योग और एक्सरसाइज कर सकते हैं? 

हां। हल्की एक्सरसाइज और योग बहुत फायदा करते हैं। बस जब बीमारी एक्टिव हो तो आराम करें।

 

क्या यह बीमारी माता-पिता से बच्चों में जाती है? 

जेनेटिक रिस्क जरूर बढ़ जाता है, लेकिन हर बच्चे को नहीं होती। अगर माता-पिता दोनों को है तो बच्चे को होने की संभावना 30-40% तक हो सकती है।

Start Your Health Insurance Today

Get right coverage, right premium and the right protection instantly.

+91
Disclaimer infoBy clicking, I agree to Niva Bupa 

Popular Searches

Health Insurance - Health Insurance | Best Family Health Insurance | Best Health Insurance For Senior Citizens In India | Health Insurance With Opd Cover | Mediclaim Insurance | Critical Illness Insurance | Personal Accident Insurance | Mediclaim Policy | Individual Health Insurance | Maternity Insurance | Best Health Insurance company | NRI Health Insurance
 

Health Insurance Schemes - PMMVY Login | PMJJBY Policy Status | Swasthya Sathi Card | PMSBY | PMJJBY | Ayushman Card | PMMVY 2.0 | Ayushman Vay Vandana Card | PMMVY NIC IN रजिस्ट्रेशन | PMMVY 2.0 लॉगिन

 

Travel Insurance Plans - Travel Insurance |  International Travel Insurance | Student Travel Insurance | Travel Insurance USA | Travel Insurance Canada | Travel Insurance Thailand | Travel Insurance Germany | Travel Insurance Dubai | Travel Insurance Bali | Travel Insurance Australia | Travel Insurance Schengen | Travel Insurance Singapore | Travel Insurance UK | Travel Insurance Vietnam | Travel Insurance Japan | Travel Insurance Spain | Travel Insurance Asia | Travel Insurance Netherlands | Travel Insurance Turkey | Travel Insurance Ireland | Travel Insurance Phillipines | Travel Insurace Italy | Travel Insurance France | Travel Insurance China | Travel Insurance Georgia | Travel Insurance South Africa | Travel Insurance Maldives | Travel Insurance Portugal | Travel Insurance Malaysia | Travel Insurance Qatar | Travel Insurance Poland | Travel Insurance Greece | Travel Insurance New zealand | Travel Insurance Saudi Arabia | Travel Insurance Sri Lanka


Become an Agent - Insurance Agent | IRDA Certificate Download | IRDA Exam Syllabus | IRDA exam fee | Paise Kaise Kamaye | Ghar Baithe Paise Kaise Kamaye

 

Top Hospitals -  Best Hospitals in Gurgaon


Others - Ayushman Bharat | Gst Refund for NRI on Health Insurance Premium

 

Health & Wellness - शिलाजीत के फायदे हिंदी | Weight Gain Diet in Hindi | Sat Isabgol Uses In Hindi | Aloe Vera Juice Benefits in Hindi | Dragon Fruit Benefits in Hindi | Akal Daad in Hindi | Acidity Home Remedies in Hindi | Nikat Drishti Dosh in Hindi | Yoga Benefits in Hindi | Laung Khane ke Fayde in Hindi | Leukoplakia in Hindi | Protien in 100g Paneer | Benefits of Rice Water For Skin | B12 Deficiency Symptoms in Hindi | Fibre Foods in Hindi | Chronic Disease Meaning in Hindi | Vitamin D Foods in Hindi | Blood Urea in Hindi | Beetroot Uses Good for Health 

 

Calculator - BMI Calculator | Pregnancy Calculator | Pregnancy Calendar Based on Conception Date | Pregnancy Conception Date Calculator | Last Menstrual Period Calculator | BMR Calculator | GFR Calculator | Ovulation Calculator