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Dyslipidemia in Hindi: क्या है और इससे होने वाले जोखिम

11 December, 2025

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Dyslipidemia in Hindi
Written by: Narender Singh

आजकल खून में फैट की मात्रा गड़बड़ होना बहुत आम हो गया है। लोग इसे आसान भाषा में कोलेस्ट्रॉल या ट्राइग्लिसराइड बढ़ना कहते हैं। मेडिकल भाषा में इसे डिसलिपिडेमिया कहते हैं। अगर आप इसे हिंदी में समझना चाहते हैं तो इसे Dyslipidemia in Hindi कह सकते हैं। यह कोई बीमारी नहीं है बल्कि एक स्थिति है जो दिल की बीमारियों का सबसे बड़ा कारण बनती है।

इस लेख में हम सरल भाषा में समझेंगे कि डिसलिपिडेमिया आखिर है क्या, यह कैसे होती है, इसके लक्षण क्या हैं, इलाज क्या है और सबसे जरूरी यह कि इससे बचने के लिए हम रोज़ क्या कर सकते हैं।

 

डिसलिपिडेमिया को समझें

 

खून में चार मुख्य तरह के फैट होते हैं

  1. कुल कोलेस्ट्रॉल
  2. एलडीएल (बुरा कोलेस्ट्रॉल)
  3. एचडीएल (अच्छा कोलेस्ट्रॉल)
  4. ट्राइग्लिसराइड

जब इनका बैलेंस बिगड़ जाता है तो डिसलिपिडेमिया हो जाता है। सबसे आम प्रकार है एलडीएल का बढ़ना और एचडीएल का कम होना। इसे Dyslipidemia in Hindi में अक्सर "खराब कोलेस्ट्रॉल बढ़ना" कहा जाता है।

 

प्राइमरी और सेकेंडरी डिसलिपिडेमिया में फर्क

 

प्राइमरी डिसलिपिडेमिया जेनेटिक होती है। मतलब परिवार में किसी को है तो आपको होने की संभावना ज्यादा रहती है।

सेकेंडरी डिसलिपिडेमिया जीवनशैली की वजह से होती है - मोटापा, डायबिटीज़, कम थायरॉइड, शराब ज्यादा पीना, गलत खान-पान।

 

डिसलिपिडेमिया के लक्षण

सबसे डरावनी बात यह है कि ज्यादातर लोगों को पता ही नहीं चलता। कोई दर्द नहीं, कोई खुजली नहीं। बस एक दिन अचानक सीने में दर्द होता है और हार्ट अटैक हो जाता है।

कुछ लोगों को गर्दन के पीछे या कंधों पर पीले-पीले उभार (जैंथोमा) दिखते हैं। आंखों के आसपास सफेद रिंग दिखना भी एक संकेत हो सकता है। लेकिन 90% लोग बिना लक्षण के ही जीते रहते हैं जब तक बड़ा नुकसान न हो जाए।

 

डिसलिपिडेमिया से होने वाले बड़े जोखिम

डिसलिपिडेमिया खामोश हत्यारा है। यह धीरे-धीरे धमनियों में चिपकता जाता है और एक दिन रास्ता पूरी तरह बंद कर देता है।

 

हृदय रोग और हार्ट अटैक

जब एलडीएल धमनियों में जमता है तो प्लाक बनता है। प्लाक फटने पर खून का थक्का बनता है और हार्ट अटैक हो जाता है। भारत में हर साल 30 लाख से ज्यादा लोग हार्ट अटैक से मरते हैं और इसका 50% से ज्यादा कारण डिसलिपिडेमिया ही है।

 

स्ट्रोक का खतरा

दिमाग की नसों में भी यही प्लाक जमता है। नस बंद हुई तो लकवा मार जाता है। 40 साल से कम उम्र के युवाओं में भी अब स्ट्रोक के मामले बढ़ रहे हैं।

 

पैरों में दर्द और गैंगरीन

पैरों की नसें बंद होने से चलते समय बहुत दर्द होता है। कई बार पैर काला पड़ जाता है और काटना पड़ता है।

 

किडनी खराब होना

किडनी की छोटी-छोटी नसें भी प्रभावित होती हैं। धीरे-धीरे किडनी फेल हो जाती है।

 

सामान्य लिपिड प्रोफाइल रेंज (टेबल)

पैरामीटर

सामान्य रेंज (mg/dL)

बॉर्डरलाइन

हाई/लो रिस्क

कुल कोलेस्ट्रॉल

कम से कम 200 से नीचे

200-239

240 से ऊपर

एलडीएल (बुरा)

100 से कम

130-159

160 से ऊपर

एचडीएल (अच्छा)

60 से ऊपर (बेहतर)

40-59

40 से कम (पुरुष), 50 से कम (महिला)

ट्राइग्लिसराइड

150 से कम

150-199

200 से ऊपर

नॉन-एचडीएल कोलेस्ट्रॉल

130 से कम

130-159

160 से ऊपर

नोट: डायबिटीज़ या पहले हार्ट अटैक हुआ हो तो एलडीएल 70 से कम रखना चाहिए।

 

डिसलिपिडेमिया क्यों बढ़ रहा है भारत में

20-30 साल पहले हमारे यहां डिसलिपिडेमिया बहुत कम था। अब हर तीसरा शहरी भारतीय इससे प्रभावित है। कारण साफ हैं

  • बाहर का तला-भुना खाना
  • घी-तेल की जगह रिफाइंड और पाम तेल
  • बैठे रहने की नौकरी
  • तनाव और नींद कम होना
  • डायबिटीज़ का बढ़ना

गांव में अब भी स्थिति थोड़ी बेहतर है लेकिन वहां भी तेज़ी से बढ़ रहा है।

 

जांच कब और कैसे करवाएं

30 साल की उम्र के बाद हर 4-5 साल में लिपिड प्रोफाइल जरूर करवाएं। अगर परिवार में किसी को हार्ट अटैक 55 साल से पहले हुआ हो तो 20 साल की उम्र से ही शुरू कर दें।

टेस्ट 9-12 घंटे भूखे रहकर सुबह खाली पेट करवाएं। एक बार की रिपोर्ट से कुछ नहीं पता चलता। 2-3 महीने बाद दोबारा करवाएं।

 

इलाज के तरीके

जीवनशैली में बदलाव (सबसे जरूरी)

  1. रोज़ 30-40 मिनट तेज़ चलें
  2. वज़न 5-10% भी कम करें तो एलडीएल 20-30 mg कम हो जाता है
  3. तला-भुना, मिठाई, कोल्ड ड्रिंक बिल्कुल कम करें
  4. घी-तेल एक व्यक्ति को दिन में 3-4 चम्मच से ज्यादा नहीं
  5. हर दिन 4-5 तरह की सब्ज़ी और 2 फल खाएं
  6. बादाम, अखरोट, अलसी के बीज रोज़ 20-25 ग्राम लें
  7. धूम्रपान और शराब छोड़ें

 

दवाइयां

स्टैटिन दवाइयां (एटोरवास्टेटिन, रोसुवास्टेटिन) सबसे असरदार हैं। ये एलडीएल 50% तक कम कर सकती हैं। कुछ लोगों को फाइब्रेट या ईजेटिमाइब भी देनी पड़ती है। दवा डॉक्टर की सलाह से ही लें। बीच में नहीं छोड़ें।

 

बच्चों में डिसलिपिडेमिया

अब 8-10 साल के बच्चों में भी कोलेस्ट्रॉल बढ़ा हुआ मिल रहा है। जंक फूड, मोबाइल और टीवी इसके लिए ज़िम्मेदार हैं। अगर परिवार में जेनेटिक समस्या है तो बच्चों की जांच 2 साल की उम्र से शुरू कर देनी चाहिए।

 

गर्भावस्था में डिसलिपिडेमिया

प्रेग्नेंसी में कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड बढ़ना नॉर्मल है। लेकिन बहुत ज्यादा बढ़ जाए तो प्री-एक्लेम्प्सिया का खतरा रहता है। डिलीवरी के बाद ज्यादातर ठीक हो जाता है।

 

निष्कर्ष

डिसलिपिडेमिया कोई लाइलाज बीमारी नहीं है। थोड़ा खान-पान और व्यायाम सुधार लें तो ज्यादातर लोग बिना दवा के भी इसे कंट्रोल कर लेते हैं। लेकिन अगर एक बार हार्ट अटैक हो जाए तो नुकसान वापस नहीं आता। इसलिए समय रहते जांच और बदलाव शुरू करें।

अच्छी हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी रखें जो हार्ट ट्रीटमेंट को अच्छे से कवर करे। Niva Bupa की health insurance पॉलिसी में हार्ट संबंधी बीमारियों का पूरा खर्च कवर होता है। ताकि इलाज की चिंता न हो और आप सिर्फ ठीक होने पर ध्यान दे सकें।

 

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (People Also Ask)

 

डिसलिपिडेमिया और हाइपरकोलेस्ट्रॉलमिया में क्या फर्क है? 

हाइपरकोलेस्ट्रॉलमिया में सिर्फ कुल कोलेस्ट्रॉल बढ़ता है। डिसलिपिडेमिया में एलडीएल, ट्राइग्लिसराइड या एचडीएल में कोई भी गड़बड़ी हो सकती है।

उम्र बढ़ने के साथ कोलेस्ट्रॉल बढ़ना नॉर्मल है क्या? 

थोड़ा बहुत बढ़ना ठीक है लेकिन 200 से ऊपर नहीं जाना चाहिए। उम्र को बहाना नहीं बनाना चाहिए।

नारियल तेल कोलेस्ट्रॉल बढ़ाता है क्या? 

पुराने अध्ययन कहते थे हां, नए अध्ययन कहते हैं नहीं। थोड़ी मात्रा में नारियल तेल लेना ठीक है।

अंडे की जर्दी खानी चाहिए या नहीं? 

दिन में 1-2 पूरी अंडी खा सकते हैं। कोलेस्ट्रॉल का डर छोड़ें।

स्टैटिन दवाइयां लीवर खराब करती हैं क्या? 

बहुत कम लोगों में ऐसा होता है। डॉक्टर हर 6 महीने में लीवर टेस्ट करवाते हैं। फायदा नुकसान से बहुत ज्यादा है।

क्या डिसलिपिडेमिया पूरी तरह ठीक हो सकता है? 

जेनेटिक वाले में पूरी तरह ठीक नहीं होता लेकिन बहुत अच्छे से कंट्रोल रहता है। लाइफस्टाइल वाले में दवा बंद भी हो सकती है।

रोज़ सुबह लहसुन की कली खाने से कोलेस्ट्रॉल कम होता है क्या? 

थोड़ा बहुत फायदा हो सकता है लेकिन स्टैटिन जितना असर नहीं।

हरी चाय कोलेस्ट्रॉल कम करती है? 

हल्का सा फायदा होता है। दिन में 2-3 कप पी सकते हैं। लेकिन सिर्फ चाय से सब ठीक नहीं होगा।

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