Hematoma Meaning in Hindi: कारण, लक्षण और इलाज की जानकारी
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शरीर के किसी हिस्से में चोट लगने पर त्वचा का रंग नीला या काला पड़ जाना एक सामान्य प्रक्रिया है। लेकिन कई बार यह समस्या केवल रंग बदलने तक सीमित नहीं रहती, बल्कि त्वचा के नीचे खून का एक थक्का जम जाता है जिसे चिकित्सा की भाषा में Hematoma Meaning in Hindi के संदर्भ में 'रक्तगुल्म' या 'आंतरिक रक्तस्राव का संचय' कहा जाता है। यह स्थिति तब उत्पन्न होती है जब रक्त वाहिकाओं (Blood Vessels) को नुकसान पहुँचता है और खून रिसकर आसपास के ऊतकों (Tissues) में जमा हो जाता है।
Hematoma Meaning in Hindi और इसके प्रकार
Hematoma Meaning in Hindi को समझना इसलिए आवश्यक है क्योंकि यह शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकता है। यह साधारण खरोंच से लेकर गंभीर आंतरिक चोट तक हो सकता है। मुख्य रूप से इसे इसके स्थान के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है:
- सबड्यूरल हेमेटोमा (Subdural Hematoma): यह मस्तिष्क और उसकी बाहरी परत के बीच होता है। यह अक्सर सिर की गंभीर चोट के कारण होता है।
- एपिड्यूरल हेमेटोमा (Epidural Hematoma): यह खोपड़ी और मस्तिष्क की सुरक्षात्मक परत के बीच होता है।
- इंट्राक्रैनील हेमेटोमा (Intracranial Hematoma): यह मस्तिष्क के ऊतकों के भीतर होता है और काफी खतरनाक माना जाता है।
- सबंगुअल हेमेटोमा (Subungual Hematoma): यह नाखून के नीचे खून जमने की स्थिति है, जो अक्सर उंगली दबने से होती है।
- इंट्रामस्कुलर हेमेटोमा (Intramuscular Hematoma): मांसपेशियों के भीतर होने वाला रक्त संचय।
हेमेटोमा होने के मुख्य कारण
जब हम Hematoma Meaning in Hindi के कारणों पर चर्चा करते हैं, तो सबसे सामान्य कारण 'ट्रॉमा' या चोट लगना होता है। जब रक्त वाहिकाओं की दीवारें टूट जाती हैं, तो रक्त बाहर निकलकर जमा होने लगता है। इसके कुछ प्रमुख कारण नीचे दिए गए हैं:
- दुर्घटनाएं: सड़क दुर्घटना, ऊंचाई से गिरना या किसी भारी वस्तु से टकराना।
- सर्जरी: कई बार ऑपरेशन के बाद उस स्थान पर रक्त का संचय हो जाता है।
- दवाएं: खून पतला करने वाली दवाएं (Blood Thinners) लेने वाले व्यक्तियों में हेमेटोमा होने का खतरा अधिक रहता है।
- चिकित्सीय स्थितियां: प्लेटलेट्स की कमी, हीमोफीलिया या लिवर की बीमारियां भी इसका कारण बन सकती हैं।
- इंजेक्शन: कभी-कभी गलत तरीके से इंजेक्शन लगने या नस फटने से भी त्वचा के नीचे खून जमा हो सकता है।
हेमेटोमा के सामान्य लक्षण
Hematoma Meaning in Hindi के लक्षणों को पहचानना उपचार की दिशा में पहला कदम है। इसके लक्षण इस बात पर निर्भर करते हैं कि हेमेटोमा शरीर के किस हिस्से में है।
- सूजन और दर्द: प्रभावित हिस्से में तेज दर्द और सूजन महसूस होना।
- त्वचा का रंग बदलना: प्रभावित क्षेत्र का रंग लाल, नीला, बैंगनी या काला हो जाना।
- लचीलापन कम होना: यदि हेमेटोमा जोड़ों या मांसपेशियों में है, तो उसे हिलाने में कठिनाई होना।
- गंभीर लक्षण: यदि यह मस्तिष्क में है, तो बेहोशी, तेज सिरदर्द, उल्टी, भ्रम या बोलने में कठिनाई जैसे लक्षण दिख सकते हैं।
हेमेटोमा का निदान और परीक्षण
चिकित्सक Hematoma Meaning in Hindi की गंभीरता को मापने के लिए शारीरिक परीक्षण और कुछ विशेष टेस्ट का सहारा लेते हैं। यदि हेमेटोमा बाहरी है, तो उसे देखकर ही पहचाना जा सकता है। लेकिन आंतरिक हेमेटोमा के लिए निम्नलिखित जांच आवश्यक होती हैं:
- सीटी स्कैन (CT Scan): सिर या पेट के आंतरिक हेमेटोमा का पता लगाने के लिए सबसे सटीक तरीका।
- एमआरआई (MRI): कोमल ऊतकों (Soft Tissues) में रक्त के जमाव की स्पष्ट तस्वीर प्राप्त करने के लिए।
- अल्ट्रासाउंड: मांसपेशियों या पेट के निचले हिस्सों में रक्त संचय देखने के लिए।
- ब्लड टेस्ट: संक्रमण या रक्त के थक्के जमने की क्षमता (Clotting Profile) की जांच करने के लिए।
हेमेटोमा का इलाज और प्रबंधन
अधिकांश छोटे हेमेटोमा समय के साथ खुद ही ठीक हो जाते हैं क्योंकि शरीर धीरे-धीरे उस रक्त को अवशोषित कर लेता है। हालांकि, बड़े या गंभीर हेमेटोमा के लिए उपचार की आवश्यकता होती है:
- R.I.C.E. तकनीक: रेस्ट (आराम), आइस (बर्फ की सिकाई), कम्प्रेशन (दबाव) और एलिवेशन (प्रभावित हिस्से को ऊपर रखना)।
- दवाएं: दर्द कम करने के लिए पेनकिलर्स दी जाती हैं। ध्यान रहे कि एस्पिरिन जैसी दवाएं बिना डॉक्टर की सलाह के न लें क्योंकि ये रक्तस्राव बढ़ा सकती हैं।
- सर्जिकल ड्रेनेज: यदि हेमेटोमा बहुत बड़ा है और अंगों पर दबाव डाल रहा है, तो डॉक्टर सुई या छोटे चीरे के माध्यम से जमे हुए खून को बाहर निकालते हैं।
- सर्जरी: मस्तिष्क या आंतरिक अंगों में गंभीर रक्तस्राव होने पर तत्काल सर्जरी की आवश्यकता होती है।
हेमेटोमा और वित्तीय सुरक्षा: Health Insurance की भूमिका
गंभीर हेमेटोमा जैसी स्थिति कभी भी बिना चेतावनी के आ सकती है, विशेष रूप से किसी दुर्घटना के बाद। मस्तिष्क या रीढ़ की हड्डी के हेमेटोमा के उपचार और सर्जरी में भारी खर्च आता है। निजी अस्पतालों में सर्जरी और डायग्नोस्टिक टेस्ट की लागत हजारों और कभी-कभी लाखों में हो सकती है। ऐसी आपातकालीन चिकित्सा स्थिति में health insurance एक ढाल की तरह काम करता है। एक अच्छी पॉलिसी न केवल अस्पताल में भर्ती होने के खर्चों (In-patient hospitalization) को कवर करती है, बल्कि सर्जरी से पहले और बाद के खर्चों (Pre and Post hospitalization) में भी मदद करती है। ₹5,00,000 से ₹10,00,000 तक का कवर होने पर आप बिना किसी वित्तीय तनाव के सर्वोत्तम इलाज प्राप्त कर सकते हैं।
बचाव के उपाय और सावधानियां
यद्यपि दुर्घटनाएं अप्रत्याशित होती हैं, फिर भी Hematoma Meaning in Hindi के जोखिम को कुछ सावधानियों से कम किया जा सकता है:
- सुरक्षा उपकरण: वाहन चलाते समय हेलमेट और सीटबेल्ट का प्रयोग करें।
- दवाओं की निगरानी: यदि आप खून पतला करने वाली दवाएं ले रहे हैं, तो नियमित रूप से डॉक्टर से परामर्श करें।
- खेल सुरक्षा: शारीरिक गतिविधियों या खेलों के दौरान उचित पैडिंग और गियर पहनें।
- घर की सुरक्षा: बुजुर्गों के लिए घर में गिरने से बचने के उपाय करें, जैसे बाथरूम में ग्रैब बार लगाना और पर्याप्त रोशनी रखना।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. हेमेटोमा और साधारण चोट के निशान में क्या अंतर है?
एक साधारण चोट (Bruise) में केवल त्वचा की सतह के पास की छोटी रक्त वाहिकाएं क्षतिग्रस्त होती हैं, जिससे हल्का रंग बदलता है। लेकिन Hematoma Meaning in Hindi के मामले में रक्त का संचय गहराई में होता है और यह एक ठोस गांठ जैसा महसूस हो सकता है। इसमें दर्द और सूजन साधारण चोट की तुलना में बहुत अधिक होती है और इसे ठीक होने में भी अधिक समय लगता है।
2. क्या सभी हेमेटोमा खतरनाक होते हैं?
नहीं, सभी हेमेटोमा खतरनाक नहीं होते हैं। जैसे नाखून के नीचे होने वाला या मामूली त्वचा के नीचे का हेमेटोमा घर पर ही ठीक हो सकता है। हालांकि, मस्तिष्क (Subdural) या महत्वपूर्ण आंतरिक अंगों में होने वाला हेमेटोमा जानलेवा हो सकता है क्योंकि यह अंगों पर दबाव डालता है और उनके कार्य को बाधित करता है। ऐसे मामलों में तत्काल चिकित्सा सहायता की आवश्यकता होती है।
3. हेमेटोमा को ठीक होने में कितना समय लगता है?
हेमेटोमा के ठीक होने का समय उसके आकार और स्थान पर निर्भर करता है। एक छोटा हेमेटोमा 1 से 2 सप्ताह में शरीर द्वारा अवशोषित कर लिया जाता है। बड़े हेमेटोमा को पूरी तरह गायब होने में एक महीने या उससे अधिक का समय लग सकता है। जैसे-जैसे यह ठीक होता है, इसका रंग नीले से हरा और फिर पीला होता जाता है।
4. सिर में हेमेटोमा होने पर डॉक्टर के पास कब जाना चाहिए?
यदि सिर पर चोट लगने के बाद आपको लगातार सिरदर्द, चक्कर आना, उल्टी होना, बोलने में परेशानी होना या हाथ-पैरों में कमजोरी महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से मिलें। यह इंट्राक्रैनील हेमेटोमा के लक्षण हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में देरी करना गंभीर मस्तिष्क क्षति या मृत्यु का कारण बन सकता है, इसलिए न्यूरोलॉजिस्ट से परामर्श लेना अनिवार्य है।
5. क्या हेमेटोमा के लिए सर्जरी हमेशा जरूरी होती है?
नहीं, सर्जरी केवल तभी आवश्यक होती है जब हेमेटोमा बहुत बड़ा हो, असहनीय दर्द पैदा कर रहा हो या किसी महत्वपूर्ण अंग या नस को दबा रहा हो। उदाहरण के लिए, मस्तिष्क में दबाव कम करने के लिए क्रैनियोटॉमी नामक सर्जरी की जा सकती है। अधिकांश अन्य मामलों में आराम, बर्फ की सिकाई और दवाओं के माध्यम से शरीर खुद ही इसे ठीक कर लेता है।
6. क्या बर्फ की सिकाई हेमेटोमा में मददगार है?
हाँ, चोट लगने के पहले 24 से 48 घंटों के भीतर बर्फ की सिकाई करना बहुत प्रभावी होता है। बर्फ रक्त वाहिकाओं को सिकोड़ देती है, जिससे आंतरिक रक्तस्राव कम हो जाता है और सूजन नियंत्रित रहती है। प्रभावित क्षेत्र पर सीधे बर्फ न लगाकर उसे कपड़े में लपेटकर 15-20 मिनट के लिए दिन में कई बार सिकाई करनी चाहिए।
7. हेमेटोमा में गर्म सिकाई कब करनी चाहिए?
गर्म सिकाई चोट लगने के लगभग 48 घंटे बाद शुरू की जानी चाहिए। शुरुआती दौर में गर्मी रक्त प्रवाह को बढ़ा सकती है, जिससे स्थिति बिगड़ सकती है। लेकिन दो दिन बाद, गर्म सिकाई से उस क्षेत्र में रक्त संचार बढ़ता है, जिससे शरीर को जमा हुए खून को अवशोषित करने में मदद मिलती है और मांसपेशियों की जकड़न कम होती है।
8. क्या एस्पिरिन लेने से हेमेटोमा बढ़ सकता है?
हाँ, एस्पिरिन और इबुप्रोफेन जैसी दवाएं गैर-स्टेरायडल एंटी-इंफ्लेमेटरी ड्रग्स (NSAIDs) हैं जो खून को पतला करती हैं। यदि आपको हेमेटोमा है, तो ये दवाएं जमाव को बढ़ा सकती हैं और रक्तस्राव को रोक पाना मुश्किल बना सकती हैं। दर्द के लिए डॉक्टर आमतौर पर पैरासिटामोल लेने की सलाह देते हैं, क्योंकि यह रक्त के थक्के जमने की प्रक्रिया को प्रभावित नहीं करती है।
9. सबंगुअल हेमेटोमा (नाखून के नीचे रक्त) का इलाज कैसे होता है?
यदि दर्द कम है, तो किसी विशेष उपचार की आवश्यकता नहीं होती, नाखून बढ़ने के साथ खून का धब्बा निकल जाता है। लेकिन यदि दर्द असहनीय है, तो डॉक्टर नाखून में एक बहुत छोटा छेद करके जमे हुए रक्त को बाहर निकाल देते हैं। इस प्रक्रिया को 'ट्रेफिनेशन' कहा जाता है, जिससे दबाव कम होता है और तुरंत राहत मिलती है।
10. क्या व्यायाम के दौरान हेमेटोमा हो सकता है?
हाँ, भारी व्यायाम या वेटलिफ्टिंग के दौरान मांसपेशियों में खिंचाव (Strain) आने से रक्त वाहिकाएं फट सकती हैं, जिससे इंट्रामस्कुलर हेमेटोमा हो सकता है। यह आमतौर पर एथलीटों में देखा जाता है। इसमें प्रभावित मांसपेशी में अचानक तेज दर्द और जकड़न महसूस होती है। ऐसे में व्यायाम तुरंत बंद करके आराम करना चाहिए ताकि चोट और न बढ़े।
11. क्या गर्भावस्था के दौरान हेमेटोमा चिंता का विषय है?
गर्भावस्था के दौरान 'सबकोरियोनिक हेमेटोमा' (Subchorionic Hematoma) हो सकता है, जहाँ गर्भाशय की दीवार और प्लेसेंटा के बीच खून जमा हो जाता है। यद्यपि यह कई मामलों में खुद ठीक हो जाता है और स्वस्थ प्रसव होता है, लेकिन यह गर्भपात या समय से पहले प्रसव के जोखिम को बढ़ा सकता है। इसलिए, गर्भावस्था में किसी भी प्रकार की ब्लीडिंग होने पर तुरंत गायनेकोलॉजिस्ट से संपर्क करना चाहिए।
12. बुजुर्गों में हेमेटोमा का खतरा अधिक क्यों होता है?
उम्र बढ़ने के साथ त्वचा पतली हो जाती है और रक्त वाहिकाएं अधिक नाजुक हो जाती हैं। इसके अलावा, कई बुजुर्ग हृदय रोगों के कारण खून पतला करने वाली दवाएं लेते हैं। इन कारणों से, बुजुर्गों में मामूली गिरने या टकराने पर भी गंभीर हेमेटोमा होने की संभावना बहुत अधिक रहती है, जिसे ठीक होने में भी काफी समय लगता है।
13. हेमेटोमा और ट्यूमर में क्या अंतर है?
हेमेटोमा रक्त का एक संग्रह है जो आमतौर पर अचानक किसी चोट के कारण होता है, जबकि ट्यूमर कोशिकाओं की असामान्य वृद्धि है जो धीरे-धीरे विकसित होती है। हेमेटोमा समय के साथ छोटा होता जाता है और रंग बदलता है, जबकि ट्यूमर आमतौर पर स्थिर रहता है या बढ़ता है। हालांकि, कभी-कभी इनके बीच अंतर करने के लिए एमआरआई या बायोप्सी की आवश्यकता हो सकती है।
14. क्या हेमेटोमा संक्रमित हो सकता है?
हालांकि यह दुर्लभ है, लेकिन हेमेटोमा में बैक्टीरिया प्रवेश कर सकते हैं, जिससे संक्रमण हो सकता है। यदि प्रभावित क्षेत्र में अचानक लाली बढ़ जाए, वहां से मवाद निकले, या आपको बुखार महसूस हो, तो यह संक्रमण (Abscess) का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में डॉक्टर एंटीबायोटिक्स दे सकते हैं या मवाद को बाहर निकालने के लिए सर्जरी कर सकते हैं।
15. आंतरिक हेमेटोमा के लिए अल्ट्रासाउंड कितना प्रभावी है?
अल्ट्रासाउंड विशेष रूप से पेट के अंगों, मांसपेशियों और ऊतकों के भीतर जमा रक्त का पता लगाने के लिए बहुत उपयोगी है। यह एक गैर-आक्रामक और सुरक्षित प्रक्रिया है। यह डॉक्टर को यह समझने में मदद करता है कि हेमेटोमा तरल अवस्था में है या जम चुका है, जिससे उपचार की योजना बनाने में आसानी होती है।
16. क्या हेमेटोमा अपने आप पूरी तरह गायब हो जाता है?
ज्यादातर छोटे और मध्यम आकार के हेमेटोमा शरीर की प्राकृतिक सफाई प्रक्रिया द्वारा पूरी तरह अवशोषित कर लिए जाते हैं। सफेद रक्त कोशिकाएं (WBCs) जमा हुए रक्त के कणों को धीरे-धीरे खत्म कर देती हैं। हालांकि, बहुत बड़े हेमेटोमा कभी-कभी पूरी तरह गायब नहीं होते और एक कठोर गांठ या दाग (Scar tissue) छोड़ सकते हैं, जो भविष्य में समस्या पैदा कर सकता है।
17. कान में हेमेटोमा (Cauliflower Ear) क्या है?
यह आमतौर पर पहलवानों या बॉक्सरों को होता है। कान पर बार-बार चोट लगने से उपास्थि (Cartilage) और त्वचा के बीच खून जमा हो जाता है। यदि इसे तुरंत नहीं निकाला गया, तो यह कान के आकार को स्थायी रूप से बिगाड़ सकता है, जिसे 'कॉलीफ्लावर ईयर' कहा जाता है। इसका इलाज सुई से खून निकालकर दबाव पट्टी बांधकर किया जाता है।
18. क्या शराब का सेवन हेमेटोमा को प्रभावित करता है?
हाँ, शराब का सेवन रक्त वाहिकाओं को फैलाता है और खून के थक्के जमने की प्रक्रिया को धीमा कर सकता है। यदि आपको हेमेटोमा हुआ है, तो शराब पीने से आंतरिक रक्तस्राव बढ़ सकता है और सूजन कम होने में अधिक समय लग सकता है। रिकवरी के दौरान शराब से परहेज करना बेहतर माना जाता है।
19. क्या हेमेटोमा के कारण एनीमिया हो सकता है?
यदि शरीर के भीतर बहुत बड़ा हेमेटोमा बनता है, जैसे जांघ की मांसपेशियों या पेट के भीतर, तो महत्वपूर्ण मात्रा में रक्त ऊतकों में जमा हो जाता है। इस कारण परिसंचरण तंत्र में रक्त की कमी हो सकती है, जिससे व्यक्ति को एनीमिया के लक्षण जैसे कमजोरी, पीलापन और सांस फूलना महसूस हो सकते हैं। बड़े आंतरिक हेमेटोमा में कभी-कभी ब्लड ट्रांसफ्यूजन की भी जरूरत पड़ती है।
20. हेमेटोमा की स्थिति में 'रेस्ट' का क्या महत्व है?
हेमेटोमा होने पर आराम करना सबसे महत्वपूर्ण है क्योंकि शारीरिक गतिविधि प्रभावित क्षेत्र में रक्त के दबाव को बढ़ा सकती है, जिससे दोबारा रक्तस्राव शुरू हो सकता है। आराम करने से शरीर को अपनी ऊर्जा मरम्मत प्रक्रिया (Healing process) में लगाने का मौका मिलता है। कम से कम 48-72 घंटों तक प्रभावित अंग पर किसी भी प्रकार का तनाव न डालने की सलाह दी जाती है।
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