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बच्चों को Mirgi Ka Dora आना: जाने लक्षण, कारण और इलाज

11 December, 2024

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mirgi ka daura

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मिर्गी (Epilepsy) या फिर फिट डिज़ीज एक न्यूरोलॉजिकल (Neurological) डिसऑर्डर है, जो बच्चों और बड़ों दोनों को प्रभावित कर सकता है। यह तब होता है जब मस्तिष्क (Brain) की इलेक्ट्रिकल एक्टिविटी में असामान्य वृद्धि होती है, जिससे अचानक और अनियंत्रित दौरे (सीज़र अटैक) आते हैं। बच्चों में मिर्गी के लक्षण पहचानना मुश्किल हो सकता है, क्योंकि ये सामान्य व्यवहारिक बदलावों से मिलते-जुलते हो सकते हैं। आइये जानें एपिलेप्सी के लक्षण, कारण और इलाज के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे।

 

बच्चों में Mirgi Attack Ke Lakshan

बच्चों में एपिलेप्सी के लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं और दौरे (सीज़र अटैक) के प्रकार पर निर्भर करते हैं। कुछ सामान्य लक्षण निम्नलिखित हो सकते हैं:

 

  • अचानक से बेहोशी या गिरना: बच्चे अचानक होश खो सकते हैं और बेहोश होकर गिर सकते हैं।
  • शरीर के अंगों में झटके (Jerking Movements): एपिलेप्सी के दौरे के दौरान बच्चे के हाथ-पैरों में झटके आने लगते हैं, जिन्हें नियंत्रित करना मुश्किल होता है।
  • आंखों का असामान्य रूप से घूमना: दौरे के समय बच्चे की आंखें एक दिशा में घुमने लगती हैं।
  • बोलने में दिक्कत: कुछ बच्चों में दौरे से पहले या बाद में बोलने में कठिनाई हो सकती है।
  • ध्यान में कमी: बच्चा अचानक कुछ समय के लिए ध्यान केंद्रित करने में सक्षम नहीं हो पाता
  • आकस्मिक कंपकंपी या भय: बच्चे अचानक से डरे हुए या बेचैन महसूस कर सकते हैं, यह भी एपिलेप्सी का एक लक्षण हो सकता है।

 

मिर्गी के कारण

एपिलेप्सी के दौरे (सीज़र अटैक) आने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। हालांकि, कुछ मामलों में इसका स्पष्ट कारण पता नहीं चलता है। बच्चों में एपिलेप्सी के कुछ सामान्य कारण निम्नलिखित हैं:

 

  • जेनेटिक फैक्टर्स: अगर परिवार में पहले से किसी को एपिलेप्सी है, तो बच्चों में इसके होने की संभावना बढ़ जाती है।
  • जन्म के समय चोट: डिलीवरी  के दौरान मस्तिष्क में चोट लगने या ऑक्सीजन की कमी होने से एपिलेप्सी विकसित हो सकती है।
  • ब्रेन इन्फेक्शन्स: मस्तिष्क में किसी प्रकार के संक्रमण जैसे मेनिन्जाइटिस (Meningitis) या एन्सेफलाइटिस (Encephalitis) भी एपिलेप्सी का कारण हो सकते हैं।
  • मस्तिष्क में ट्यूमर (Brain Tumors): बच्चों में मस्तिष्क के ट्यूमर भी एपिलेप्सी का कारण हो सकते हैं।

 

बच्चों में मिर्गी के प्रकार

बच्चों में एपिलेप्सी के कई प्रकार होते हैं, जिनमें मुख्य रूप से दो प्रकार शामिल हैं:

 

फोकल एपिलेप्सी (Focal Epilepsy)

इसमें दौरे मस्तिष्क के एक हिस्से में शुरू होते हैं। बच्चों में ये दौरे शरीर के एक हिस्से में झटके, अजीब संवेदनाएं, या असामान्य हरकतें पैदा कर सकते हैं।

 

जनरलाइज़्ड एपिलेप्सी (Generalized Epilepsy)

इसमें दौरे मस्तिष्क के दोनों हिस्सों में एक साथ शुरू होते हैं। बच्चे अचानक बेहोश हो सकते हैं, पूरे शरीर में झटके महसूस होते हैं, और उनकी जागरूकता में कमी आ सकती है।

 

हर प्रकार के दौरे के लक्षण और इलाज अलग-अलग होते हैं, जो बच्चे की स्थिति पर निर्भर करते हैं।

 

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एपिलेप्सी का इलाज

एपिलेप्सी का इलाज व्यक्ति के दौरे के प्रकार, उनकी गंभीरता और अन्य स्वास्थ्य स्थितियों पर निर्भर करता है। बच्चों में एपिलेप्सी के इलाज के लिए निम्नलिखित तरीके अपनाए जा सकते हैं:

 

  • दवाइयां:  फिट डिज़ीज के लिए एंटी एपिलेप्टिक दवाइयों (antiepileptic drugs) का इस्तेमाल किया जाता है, जो दौरे की संभावना को कम करती हैं। यह दवाइयां डॉक्टर की सलाह पर दी जानी चाहिए।
  • सर्जरी: अगर दवाओं से दौरे नियंत्रित नहीं होते, तो सर्जरी एक विकल्प हो सकती है। इसमें मस्तिष्क के उस हिस्से को हटाया जाता है जो दौरे का कारण बनता है।
  • किटोजेनिक डाइट: कुछ बच्चों के लिए उच्च वसा और कम कार्बोहाइड्रेट वाली डाइट (Diet) मिर्गी के इलाज में सहायक हो सकती है। यह डाइट डॉक्टर की सलाह पर ही दी जानी चाहिए।
  • वेगस नर्व स्टिमुलेशन (Vagus Nerve Stimulation): यह एक ट्रीटमेंट मेथड है जिसमें एक डिवाइस से ब्रेन के वेगस नर्व को स्टिमुलेट किया जाता है ताकि दौरे नियंत्रित किए जा सकें।

 

एपिलेप्सी के दौरान क्या करें?

एपिलेप्सी के दौरे (सीज़र अटैक) के दौरान बच्चों की सुरक्षा के लिए कुछ विशेष सावधानियां बरतनी चाहिए:

 

  • दौरे के दौरान बच्चे को सीधा लिटा दें और उनके आसपास की चीजें हटा दें ताकि चोट न लगे।
  • बच्चे के सिर के नीचे नरम कपड़ा रखें।
  • दौरे के दौरान बच्चे के मुंह में कुछ भी डालने से बचें।
  • दौरे की अवधि को ध्यान से देखें और डॉक्टर को इसकी जानकारी दें।

 

निष्कर्ष

बच्चों में मिर्गी एक जटिल लेकिन मैनेजऐबलस्थिति है। इसके लक्षणों की समय रहते पहचान और उचित इलाज से बच्चों का जीवन सामान्य हो सकता है। अगर आपके बच्चे में एपिलेप्सी के लक्षण दिखें, तो तुरंत विशेषज्ञ से संपर्क करें।

 

अगर आपके परिवार में कोई सदस्य एपिलेप्सी से पीड़ित है, तो उनकी सुरक्षा और इलाज में सहायता के लिए एक उपयुक्त स्वास्थ्य बीमा आवश्यक है। निवा बूपा जैसी विश्वसनीय स्वास्थ्य बीमा कंपनी आपके बच्चों की चिकित्सा जरूरतों को कवर करने वाले योजनाएं प्रदान करती है, जिससे आप बिना आर्थिक तनाव के सही समय पर इलाज करवा सकते हैं।

 

FAQ

  1. बच्चों में मिर्गी के लक्षण क्या होते हैं?

    बच्चों में मिर्गी के लक्षणों में अचानक बेहोश हो जाना, हाथ-पैरों का झटके लेना, बिना कारण घूरना, भ्रमित रहना, बार-बार गिरना, या शरीर के किसी हिस्से में अनियंत्रित हलचल शामिल हो सकते हैं। कभी-कभी मिर्गी के दौरे हल्के होते हैं और सिर्फ कुछ सेकंड तक रहते हैं, जबकि कुछ मामलों में लंबे और गंभीर दौरे भी हो सकते हैं। यदि आपके बच्चे में ये लक्षण दिखें, तो जल्द से जल्द डॉक्टर से परामर्श करें।

  2. बच्चों में मिर्गी के कारण क्या होते हैं?

    बच्चों में मिर्गी के कई कारण हो सकते हैं, जैसे दिमागी चोट, संक्रमण, जेनेटिक कारण, जन्म के समय ऑक्सीजन की कमी, ब्रेन ट्यूमर, या न्यूरोलॉजिकल समस्याएं। कुछ मामलों में, मिर्गी का सटीक कारण पता नहीं चलता, लेकिन EEG और MRI जैसी जांचों से इसके कारणों का पता लगाया जा सकता है। अगर परिवार में मिर्गी का इतिहास है, तो बच्चे में इसके होने की संभावना बढ़ सकती है।

  3. क्या बच्चों में मिर्गी का इलाज संभव है?

    हाँ, बच्चों में मिर्गी का इलाज संभव है। दवाओं के नियमित सेवन से 70-80% बच्चों में दौरे पूरी तरह नियंत्रित किए जा सकते हैं। यदि दवाओं से फायदा न हो तो डॉक्टर सर्जरी, केटोजेनिक डाइट, या न्यूरोस्टिमुलेशन जैसी तकनीकों की सलाह दे सकते हैं। सही समय पर निदान और उपचार से मिर्गी से पीड़ित बच्चे भी सामान्य जीवन जी सकते हैं।

  4. बच्चों में मिर्गी का इलाज कौन-कौन सी दवाओं से किया जाता है?

    बच्चों में मिर्गी का इलाज आमतौर पर एंटी-एपिलेप्टिक ड्रग्स (AEDs) से किया जाता है। इसमें वेलप्रोइक एसिड, कार्बामाज़ेपिन, लैमोट्रिजीन और लेवेटिरासेटम जैसी दवाएं शामिल हैं। डॉक्टर बच्चे की उम्र, दौरे के प्रकार और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार दवा का चयन करते हैं। दवाएं नियमित रूप से लेने से मिर्गी के दौरे को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

  5. क्या बच्चों की मिर्गी का असर उनकी पढ़ाई पर पड़ता है?

    हां, कुछ बच्चों की मिर्गी उनके ध्यान, स्मरण शक्ति और सीखने की क्षमता को प्रभावित कर सकती है, खासकर अगर दौरे बार-बार आते हैं या दवा का प्रभाव कम हो। हालांकि, सही इलाज, स्कूल में अतिरिक्त सहयोग, और मानसिक रूप से मजबूत माहौल देने से बच्चे अच्छी तरह पढ़ाई कर सकते हैं। कुछ मामलों में, विशेष शिक्षा की जरूरत पड़ सकती है।

  6. क्या मिर्गी वाले बच्चे सामान्य जीवन जी सकते हैं?

    हाँ, सही इलाज और देखभाल से मिर्गी वाले बच्चे सामान्य जीवन जी सकते हैं। अधिकतर मामलों में दवाओं से मिर्गी को पूरी तरह नियंत्रित किया जा सकता है। माता-पिता और शिक्षकों को चाहिए कि वे बच्चे को मानसिक रूप से मजबूत बनाएं और उसे आत्मनिर्भर बनने में मदद करें। डॉक्टर की सलाह और सही जीवनशैली अपनाकर बच्चे खेल-कूद, पढ़ाई और अन्य गतिविधियों में सामान्य रूप से भाग ले सकते हैं।

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