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Paronychia in Hindi: कारण, लक्षण और उपचार जानें

8 June, 2026

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paronychia in hindi

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Written by: Narender Singh
Summary

पैरोनाइकिया नाखूनों के आसपास होने वाला एक आम संक्रमण है, जो बैक्टीरिया या फंगस के कारण हो सकता है। इसमें सूजन, दर्द, लालिमा और पस जैसी समस्याएं दिखाई देती हैं। समय पर इलाज और सही देखभाल से यह आसानी से ठीक हो सकता है। नाखूनों की सफाई, हाथों को सूखा रखना और शुरुआती लक्षणों पर ध्यान देना संक्रमण से बचाव में मदद करता है।

नाखून के आसपास की सूजी हुई, लाल और दर्द करने वाली त्वचा को लोग अक्सर छोटी-सी समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। कोई क्रीम लगा ली, दो-चार दिन इंतजार कर लिया और सोच लिया कि अपने आप ठीक हो जाएगा। कई बार ऐसा हो भी जाता है, लेकिन जब समस्या बढ़ने लगती है, तब समझ आता है कि यह साधारण इन्फेक्शन नहीं बल्कि पैरोनाइकिया हो सकता है। ऐसे समय पर सही जानकारी बहुत फर्क डालती है।

 

पैरोनाइकिया जितना लोग समझते हैं, उससे कहीं ज्यादा आम समस्या है। यह बच्चों, बड़ों, ऑफिस में काम करने वालों और दिनभर पानी में हाथ रखने वाले लोगों को सभी को हो सकता है। आमतौर पर यह खतरनाक नहीं होता, लेकिन इसे नजरअंदाज करना बड़ी गलती साबित हो सकता है। इस ब्लॉग में हम आसान भाषा में समझेंगे कि paronychia in Hindi क्या है, इसके मुख्य कारण, लक्षण और सबसे अच्छे इलाज के विकल्प कौन से हैं।

पैरोनाइकिया क्या होता है?

पैरोनाइकिया नाखून के आसपास की त्वचा में होने वाला इन्फेक्शन है। यह हाथों की उंगलियों या पैरों के नाखूनों, दोनों में हो सकता है। जब नाखून के आसपास की त्वचा कट जाती है, फट जाती है या उसमें छोटी-सी दरार बन जाती है, तब बैक्टीरिया या फंगस अंदर पहुंच जाते हैं और संक्रमण शुरू हो जाता है।

 

नाखून के चारों ओर जो त्वचा होती है, उसे नेल फोल्ड कहा जाता है। वहीं नीचे की तरफ क्यूटिकल होती है। इन हिस्सों में चोट या कट लगने पर संक्रमण होने का खतरा बढ़ जाता है। पैरोनाइकिया मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है।

 

तीव्र पैरोनाइकिया 

यह अचानक शुरू होता है और आमतौर पर एक-दो दिन के अंदर लक्षण दिखने लगते हैं। ज्यादातर मामलों में इसका कारण बैक्टीरिया होते हैं। सही इलाज मिलने पर यह कुछ हफ्तों में ठीक हो जाता है।

 

क्रॉनिक पैरोनाइकिया 

यह धीरे-धीरे विकसित होता है और छह हफ्ते या उससे ज्यादा समय तक बना रह सकता है। कई बार यह बार-बार लौटकर भी आता है। इसका मुख्य कारण फंगस, खासकर Candida नाम का यीस्ट होता है। जिन लोगों के हाथ लंबे समय तक पानी या केमिकल्स में रहते हैं, उनमें यह ज्यादा देखा जाता है। यह एक साथ कई नाखूनों को प्रभावित कर सकता है।

 

एक जरूरी बात यह भी है कि महिलाओं में यह संक्रमण पुरुषों की तुलना में ज्यादा देखा जाता है। खासकर वे महिलाएं जो लगातार पानी या सफाई वाले केमिकल्स के संपर्क में रहती हैं, उनमें जोखिम अधिक होता है।

 

पैरोनाइकिया होने के कारण

इस संक्रमण के पीछे कई कारण हो सकते हैं और इनमें से कुछ आदतें तो बहुत आम हैं।

 

नाखून चबाना और क्यूटिकल्स को ज्यादा काटना

नाखून चबाने की आदत संक्रमण का बड़ा कारण बन सकती है। जब आप नाखून के आसपास की त्वचा को खींचते हैं या मेनिक्योर के दौरान क्यूटिकल्स को बहुत ज्यादा पीछे धकेलते हैं, तब त्वचा में छोटे-छोटे कट बन जाते हैं। इन्हीं रास्तों से बैक्टीरिया अंदर पहुंच जाते हैं। अधिकतर मामलों में Staphylococcus aureus नाम का बैक्टीरिया जिम्मेदार होता है।

 

लंबे समय तक हाथ गीले रहना

बारटेंडर, नर्स, तैराक या ऐसे लोग जिनके हाथ लंबे समय तक पानी में रहते हैं, उनमें यह समस्या ज्यादा होती है। लगातार पानी के संपर्क में रहने से त्वचा मुलायम होकर कमजोर हो जाती है। बार-बार सूखने और गीला होने से त्वचा फटने लगती है, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।

 

अंदर की तरफ बढ़ने वाला नाखून

जब पैर का नाखून त्वचा के अंदर बढ़ने लगता है, तब वहां घाव बन जाता है। यही घाव बैक्टीरिया के लिए रास्ता तैयार करता है और संक्रमण शुरू हो सकता है। पैरों में पैरोनाइकिया का यह एक सामान्य कारण है।

 

कुछ बीमारियां और दवाइयां

डायबिटीजHIV या कमज़ोर इम्यून सिस्टम वाले लोगों में संक्रमण का खतरा ज्यादा रहता है क्योंकि उनका शरीर संक्रमण से लड़ने में कमज़ोर होता है। डायबिटीज में खराब ब्लड सर्कुलेशन भी समस्या को बढ़ा देता है।

 

कुछ दवाइयां भी जोखिम बढ़ाती हैं, जैसे रेटिनॉइड्स, कुछ कीमोथेरेपी दवाइयां और HIV की एंटीरेट्रोवायरल दवाइयां। अगर ऐसी दवाइयां लेते समय नाखूनों में बदलाव दिखे, तो डॉक्टर से बात करना जरूरी है।

 

पैरोनाइकिया के लक्षण

लक्षण इस बात पर निर्भर करते हैं कि संक्रमण तीव्र है या क्रॉनिक, लेकिन आमतौर पर लोगों में ये समस्याएं दिखाई देती हैं:

 

  • नाखून के आसपास दर्द या धड़कन जैसा महसूस होना
  • त्वचा में सूजन आना
  • लालिमा और गर्माहट महसूस होना
  • नाखून के किनारे पीला या सफेद पस बनना
  • नाखून का रंग बदलकर पीला या हरा होना
  • गंभीर स्थिति में नाखून का त्वचा से अलग होने लगना
  • नाखून पर लकीरें, सूखापन या टूटने जैसी समस्या
  • ज्यादा गंभीर मामलों में बुखार, ठंड लगना या लाल धारियां दिखाई देना, जो संक्रमण फैलने का संकेत हो सकता है

 

तीव्र पैरोनाइकिया आमतौर पर एक ही नाखून में होता है और तेजी से बढ़ता है। वहीं क्रॉनिक पैरोनाइकिया धीरे-धीरे बढ़ता है और कई नाखूनों को प्रभावित कर सकता है।

 

पैरोनाइकिया की जांच कैसे होती है?

ज्यादातर मामलों में डॉक्टर सिर्फ देखकर ही बीमारी पहचान लेते हैं। सामान्य स्थिति में ज्यादा टेस्ट की जरूरत नहीं पड़ती।

 

  • डॉक्टर सबसे पहले नाखून और उसके आसपास की त्वचा की जांच करते हैं ताकि सूजन, लालिमा या दर्द का पता चल सके।
  • अगर पस मौजूद हो, तो उसका छोटा-सा सैंपल लिया जाता है ताकि यह पता लगाया जा सके कि संक्रमण बैक्टीरिया से है या फंगस से।
  • ग्राम स्टेन टेस्ट बैक्टीरिया की पहचान में मदद करता है, खासकर तब जब शुरुआती इलाज असर नहीं कर रहा हो।
  • अगर फंगल संक्रमण का शक हो, तो KOH smear टेस्ट किया जा सकता है।
  • बहुत कम मामलों में एक्स-रे की जरूरत पड़ती है, लेकिन अगर डॉक्टर को लगे कि संक्रमण हड्डी तक पहुंच गया है, तब यह टेस्ट करवाया जा सकता है।

 

पैरोनाइकिया का इलाज

इलाज इस बात पर निर्भर करता है कि संक्रमण कितना गंभीर है और उसका कारण क्या है। हल्के मामलों का इलाज घर पर हो सकता है, लेकिन ज्यादा गंभीर स्थिति में डॉक्टर की जरूरत पड़ती है।

 

गुनगुने पानी से सिकाई

हल्के तीव्र पैरोनाइकिया में सबसे पहले यही तरीका अपनाया जाता है। एक बर्तन में आरामदायक गुनगुना पानी लें और प्रभावित उंगली या पैर को लगभग 15 से 20 मिनट तक उसमें डुबोकर रखें। ऐसा दिन में तीन-चार बार करें। इससे सूजन कम होती है और पस अपने-आप बाहर निकलने में मदद मिलती है। सिकाई के बाद जगह को अच्छी तरह सुखाना जरूरी है, क्योंकि नमी संक्रमण को और बढ़ा सकती है।

 

एंटीबायोटिक और क्रीम

अगर सिर्फ सिकाई से आराम नहीं मिलता, तो डॉक्टर दवाइयां लिख सकते हैं। बैक्टीरियल संक्रमण में ओरल एंटीबायोटिक दी जाती है। Dicloxacillin और Cephalexin जैसी दवाइयां अक्सर इस्तेमाल की जाती हैं। दवा का पूरा कोर्स खत्म करना जरूरी है, वरना संक्रमण दोबारा लौट सकता है।

 

हल्के मामलों में एंटीबायोटिक क्रीम और हल्की स्टेरॉयड क्रीम भी दी जा सकती है। वहीं फंगल संक्रमण में एंटीफंगल दवाइयों का इस्तेमाल किया जाता है।

 

पस निकलवाने की प्रक्रिया

जब पस बहुत ज्यादा जमा हो जाए और खुद से बाहर न निकले, तब डॉक्टर छोटी-सी प्रक्रिया करके उसे निकालते हैं। पहले जगह को साफ और सुन्न किया जाता है, फिर छोटा-सा कट लगाकर पस बाहर निकाला जाता है। इसके बाद पट्टी कर दी जाती है। सही देखभाल करने पर रिकवरी जल्दी हो जाती है।

 

बार-बार होने वाले संक्रमण का इलाज

कुछ लोगों में क्रॉनिक पैरोनाइकिया बार-बार लौटता रहता है। ऐसे मामलों में कभी-कभी नाखून का छोटा हिस्सा हटाना पड़ सकता है। कुछ स्थितियों में marsupialisation नाम की प्रक्रिया की जाती है, जिसमें ड्रेनेज के लिए छोटा-सा स्थायी रास्ता बनाया जाता है।

 

निष्कर्ष

पैरोनाइकिया शुरुआत में मामूली समस्या लगता है, लेकिन समय पर ध्यान न देने पर यह काफी दर्दनाक और परेशान करने वाला बन सकता है। अच्छी बात यह है कि जल्दी इलाज मिलने पर यह आसानी से ठीक हो जाता है। अपने नाखूनों की सफाई रखें, क्यूटिकल्स के साथ ज्यादा सख्ती न करें और लंबे समय तक पानी में काम करते समय हाथों की सुरक्षा करें। अगर दो-तीन दिन तक घरेलू इलाज से आराम न मिले, तो डॉक्टर से जरूर मिलें।

 

स्वास्थ्य का ध्यान रखने का मतलब सिर्फ बीमारी का इलाज करवाना नहीं, बल्कि अचानक आने वाले मेडिकल खर्चों के लिए तैयार रहना भी है। डॉक्टर विजिट, दवाइयां और छोटी प्रक्रियाएं भी काफी खर्च बढ़ा सकती हैं। ऐसे समय में अच्छा हेल्थ इंश्योरेंस काफी मददगार साबित होता है। Niva Bupa Health Insurance ऐसे प्लान्स देता है जो मेडिकल जरूरतों के समय आर्थिक चिंता कम करने में मदद करते हैं।

 

FAQs

 

1. पैरोनाइकिया जल्दी ठीक करने का सबसे तेज तरीका क्या है?

हल्के मामलों में गुनगुने पानी से सिकाई काफी असरदार होती है। दिन में तीन-चार बार सिकाई करने से दो दिनों में फर्क दिखने लगता है। अगर पस बन रहा हो या दर्द बढ़ रहा हो, तो डॉक्टर से इलाज लेना बेहतर है।

 

2. क्या यह संक्रमण अपने आप ठीक हो सकता है?

बहुत हल्के मामलों में ऐसा हो सकता है, लेकिन अगर पस बन चुका है तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय के साथ संक्रमण और जिद्दी हो सकता है।

 

3. बैक्टीरियल और फंगल पैरोनाइकिया में फर्क कैसे पता चलता है?

बैक्टीरियल संक्रमण अचानक होता है और उसमें तेज दर्द, लालिमा और पस ज्यादा दिखता है। फंगल संक्रमण धीरे-धीरे बढ़ता है और उसमें नाखून का रंग बदलना और सूजन ज्यादा दिखाई देती है।

 

4. क्या पैरोनाइकिया फैलता है?

यह सामान्य छूने से नहीं फैलता, लेकिन संक्रमित व्यक्ति के नेल कटर या नेल फाइल शेयर करने से बैक्टीरिया या फंगस फैल सकते हैं।

 

5. घरेलू इलाज कब बंद करके डॉक्टर को दिखाना चाहिए?

अगर दो-तीन दिन तक सिकाई करने के बाद भी आराम न मिले, सूजन बढ़ने लगे, बुखार आए या लाल धारियां दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए।

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