Visceral Fat Kya Hota Hai? जानें यह क्यों है खतरनाक
8 June, 2026
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आजकल बढ़ता वजन सिर्फ दिखने की समस्या नहीं रह गया है। कई लोग बाहर से सामान्य दिखते हैं, लेकिन उनके पेट के अंदर खतरनाक चर्बी जमा होने लगती है। इसे ही विसरल फैट (Visceral Fat) कहा जाता है। यह फैट शरीर के अंदरूनी अंगों जैसे लिवर, आंत और पेट के आसपास जमा होता है और धीरे-धीरे कई गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है।
कई बार लोग सोचते हैं कि सिर्फ मोटे लोगों को ही फैट की समस्या होती है, लेकिन ऐसा नहीं है। पतले दिखने वाले लोगों में भी विसरल फैट बढ़ सकता है। इसलिए इसके बारे में सही जानकारी होना बहुत जरूरी है।
विसरल फैट क्या होता है?
विसरल फैट वह चर्बी होती है जो त्वचा के नीचे नहीं बल्कि पेट के अंदर गहराई में जमा होती है। यह शरीर के महत्वपूर्ण अंगों को घेर लेती है। सामान्य फैट की तुलना में यह ज्यादा खतरनाक माना जाता है क्योंकि यह शरीर के हार्मोन और मेटाबॉलिज्म को प्रभावित करता है।
आमतौर पर शरीर में थोड़ी मात्रा में विसरल फैट होना सामान्य है क्योंकि यह अंगों की सुरक्षा करता है। लेकिन जब इसकी मात्रा बढ़ने लगती है, तब यह स्वास्थ्य के लिए खतरा बन जाता है।
विसरल फैट और सामान्य फैट में अंतर
शरीर में दो तरह की चर्बी पाई जाती है:
सबक्यूटेनियस फैट
यह वह चर्बी है जो त्वचा के ठीक नीचे जमा होती है। इसे हाथ से दबाकर महसूस किया जा सकता है, जैसे पेट, जांघ या बाजुओं पर। यह शरीर को ऊर्जा का भंडार देती है और ठंड से बचाने में भी मदद करती है। हालांकि, अगर यह बहुत अधिक मात्रा में बढ़ जाए तो शरीर का आकार बिगड़ सकता है और आत्मविश्वास पर असर डाल सकता है। अच्छी बात यह है कि इसे नियमित व्यायाम, संतुलित आहार और सक्रिय जीवनशैली से कम किया जा सकता है।
विसरल फैट
यह चर्बी शरीर के अंदरूनी अंगों जैसे लिवर, किडनी और आंतों के आसपास जमा होती है। इसे बाहर से देखा या छुआ नहीं जा सकता, लेकिन यही सबसे खतरनाक होती है। यही कारण है कि लोग Visceral Fat Kya Hota Hai पूछते हैं। यह फैट हार्ट डिजीज, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और स्ट्रोक जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ा देता है। खास बात यह है कि बाहर से पेट ज्यादा बड़ा न दिखे, फिर भी अंदर विसरल फैट बढ़ सकता है। इसे नियंत्रित करने के लिए संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और तनाव कम करना बेहद जरूरी है।
विसरल फैट बढ़ने के कारण
विसरल फैट अचानक नहीं बढ़ता। इसके पीछे कई आदतें और लाइफस्टाइल कारण जिम्मेदार होते हैं।
खराब खानपान
खराब खानपान में वसायुक्त भोजन बढ़ने का सबसे बड़ा कारण माना जाता है। जब हम ज्यादा तला-भुना, फास्ट फूड, मीठी चीजें और जंक फूड खाते हैं तो शरीर को ज़रूरी पोषण नहीं मिलता और केवल खाली कैलोरी जमा होती है। लंबे समय तक असंतुलित आहार लेने से वजन तेजी से बढ़ता है और पेट के आसपास चर्बी जमने लगती है। अगर खानपान में फल, सब्जियाँ और साबुत अनाज शामिल किए जाएँ तो इस खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
शारीरिक गतिविधि की कमी
शारीरिक गतिविधि की कमी भी विसरल फैट बढ़ने का एक बड़ा कारण है। लंबे समय तक बैठे रहना और एक्सरसाइज न करना शरीर की कैलोरी बर्न करने की क्षमता को कम कर देता है। ऑफिस में लगातार बैठकर काम करने वाले लोगों में यह समस्या ज्यादा देखी जाती है क्योंकि उनकी दिनचर्या में शारीरिक गतिविधि लगभग नहीं होती। नियमित वॉक, योग और हल्की-फुल्की एक्सरसाइज से इस समस्या को नियंत्रित किया जा सकता है और पेट की चर्बी को कम किया जा सकता है।
तनाव
तनाव भी शरीर में विसरल फैट बढ़ाने में अहम भूमिका निभाता है। ज्यादा तनाव लेने पर शरीर में कोर्टिसोल हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है, जो पेट के आसपास फैट जमा करने लगता है। इसके अलावा तनाव के कारण लोग अक्सर ज्यादा खाना खाने लगते हैं, खासकर मीठा और तला-भुना, जिससे वजन और तेजी से बढ़ता है। लंबे समय तक तनाव रहने से नींद और मेटाबॉलिज्म भी प्रभावित होते हैं। ध्यान, मेडिटेशन और रिलैक्सेशन तकनीकें तनाव कम करने में मदद करती हैं और फैट को नियंत्रित रखती हैं।
नींद की कमी
नींद की कमी भी वसा के बढ़ने का एक बड़ा कारण है। जब हम पर्याप्त नींद नहीं लेते तो शरीर का मेटाबॉलिज्म प्रभावित होता है और वजन बढ़ने लगता है। नींद की कमी से हार्मोन असंतुलित हो जाते हैं, जिससे भूख ज्यादा लगती है और लोग अनावश्यक रूप से ज्यादा खाते हैं। लगातार नींद पूरी न होने पर शरीर ऊर्जा बचाने के लिए फैट जमा करने लगता है। रोजाना 7-8 घंटे की नींद लेना स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी है और इससे पेट की चर्बी को नियंत्रित किया जा सकता है।
शराब और धूम्रपान
अधिक शराब पीना और धूम्रपान करना भी वसायुक्त फैट बढ़ाने में भूमिका निभाते हैं। शराब में मौजूद खाली कैलोरी सीधे पेट के आसपास चर्बी बढ़ाती है और धीरे-धीरे वजन बढ़ने लगता है। वहीं धूम्रपान शरीर के हार्मोन और मेटाबॉलिज्म को बिगाड़ देता है, जिससे फैट तेजी से जमा होता है। इन आदतों को छोड़ना लंबे समय तक स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए आवश्यक है और इससे पेट की चर्बी को नियंत्रित किया जा सकता है।
बढ़ती उम्र
उम्र बढ़ने के साथ शरीर की कैलोरी बर्न करने की क्षमता कम होने लगती है, जिससे फैट जमा होने लगता है। हार्मोनल बदलाव भी वजन बढ़ने और पेट की चर्बी बढ़ने में योगदान देते हैं। इसके अलावा मांसपेशियों की ताकत घटने से शरीर की ऊर्जा खपत कम हो जाती है और फैट तेजी से जमा होता है। संतुलित आहार और नियमित व्यायाम से उम्र बढ़ने पर भी फैट को नियंत्रित किया जा सकता है और स्वास्थ्य को लंबे समय तक बनाए रखा जा सकता है।
विसरल फैट के लक्षण
विसरल फैट हमेशा आसानी से दिखाई नहीं देता, लेकिन कुछ संकेत इसके बढ़ने की ओर इशारा कर सकते हैं।
- पेट का बाहर निकलना अक्सर इस बात का संकेत होता है कि शरीर के अंदर वसा बढ़ रही है। जब पेट धीरे-धीरे बाहर की ओर निकलने लगे और कपड़े तंग महसूस होने लगें, तो यह केवल सतही चर्बी नहीं बल्कि अंदरूनी अंगों के आसपास जमा फैट का परिणाम हो सकता है।
- कमर का साइज लगातार बढ़ना भी विसरल फैट का एक प्रमुख लक्षण है। यदि आपकी कमर का माप समय के साथ बढ़ता जा रहा है, तो यह इस बात की ओर इशारा करता है कि शरीर के अंदर फैट जमा हो रहा है, भले ही वजन बहुत ज्यादा न बढ़ा हो।
- जल्दी थकान महसूस होना भी एक संकेत है। जब शरीर में विसरल फैट बढ़ता है तो ऊर्जा का स्तर कम हो जाता है और हल्की-फुल्की गतिविधियों के बाद भी थकान महसूस होने लगती है।
- सांस फूलना भी विसरल फैट से जुड़ा हुआ लक्षण है। पेट के आसपास जमा फैट फेफड़ों और डायाफ्राम पर दबाव डालता है, जिससे थोड़ी सी मेहनत करने पर भी सांस लेने में कठिनाई हो सकती है।
- ब्लड प्रेशर बढ़ना विसरल फैट का एक गंभीर परिणाम है। अंदरूनी अंगों पर दबाव और हार्मोनल असंतुलन के कारण रक्तचाप धीरे-धीरे बढ़ने लगता है, जो हृदय रोगों का खतरा बढ़ाता है।
- ब्लड शुगर लेवल बढ़ना भी इसी का हिस्सा है। जब शरीर में विसरल फैट बढ़ता है तो इंसुलिन की कार्यक्षमता प्रभावित होती है और ब्लड शुगर का स्तर असामान्य रूप से बढ़ने लगता है, जिससे डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है।
विसरल फैट कितना खतरनाक हो सकता है?
विसरल फैट सिर्फ वजन बढ़ाने तक सीमित नहीं रहता। यह शरीर में सूजन बढ़ाता है और कई गंभीर बीमारियों का खतरा पैदा कर सकता है।
- डायबिटीज का खतरा- यह इंसुलिन के काम को प्रभावित करता है, जिससे टाइप 2 डायबिटीज होने का खतरा बढ़ जाता है।
- हृदय रोग- विसरल फैट कोलेस्ट्रॉल और ब्लड प्रेशर बढ़ा सकता है, जिससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है।
- फैटी लिवर- पेट के अंदर जमा फैट लिवर में भी चर्बी जमा हो सकती है।
- हार्मोनल असंतुलन- यह शरीर के हार्मोन पर असर डालता है और कई स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकता है।
- नींद से जुड़ी समस्याएं- ज्यादा विसरल फैट वाले लोगों में स्लीप एपनिया जैसी समस्या देखने को मिल सकती है।
विसरल फैट कम करने के तरीके
अच्छी बात यह है कि सही लाइफस्टाइल अपनाकर और रोज़मर्रा की आदतों में बदलाव करके विसरल फैट को धीरे-धीरे कम किया जा सकता है।
- रोजाना एक्सरसाइज करना विसरल फैट कम करने का सबसे प्रभावी तरीका है। तेज़ चलना, रनिंग, साइकलिंग, स्विमिंग, योग और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग जैसी गतिविधियाँ शरीर की अतिरिक्त कैलोरी को बर्न करती हैं और पेट के आसपास जमा फैट को घटाने में मदद करती हैं। हर दिन कम से कम 30 से 45 मिनट शारीरिक गतिविधि करने की कोशिश करनी चाहिए ताकि लंबे समय तक स्वास्थ्य बेहतर बना रहे।
- हेल्दी डाइट लेना भी उतना ही जरूरी है क्योंकि खानपान में बदलाव किए बिना फैट कम करना मुश्किल होता है। हरी सब्जियाँ, फल, ओट्स, दालें, प्रोटीन युक्त भोजन और ड्राई फ्रूट्स को आहार में शामिल करना चाहिए, जबकि मीठे पेय, जंक फूड, ज्यादा तेल वाला खाना और प्रोसेस्ड फूड से दूरी बनानी चाहिए। संतुलित आहार शरीर को पोषण देता है और फैट को नियंत्रित करता है।
- चीनी कम करना भी वसा का फैट घटाने का एक अहम कदम है। अधिक चीनी शरीर में फैट जमा करने का बड़ा कारण होती है, खासकर कोल्ड ड्रिंक और पैकेज्ड जूस जैसे पेय पदार्थ। इनसे बचकर प्राकृतिक मिठास जैसे फलों का सेवन करना बेहतर विकल्प है।
- पर्याप्त नींद लेना भी जरूरी है क्योंकि नींद की कमी से शरीर का मेटाबॉलिज्म प्रभावित होता है। हर रात 7 से 8 घंटे की अच्छी नींद लेने से शरीर को आराम मिलता है और ऊर्जा का स्तर संतुलित रहता है, जिससे फैट जमा होने की संभावना कम हो जाती है।
- तनाव कम करना भी विसरल फैट घटाने में मदद करता है। तनाव के कारण कोर्टिसोल हार्मोन बढ़ता है जो पेट के आसपास फैट जमा करता है। मेडिटेशन, योग, पसंदीदा काम करना और स्क्रीन टाइम कम करना तनाव को घटाने के अच्छे उपाय हैं।
- शराब और स्मोकिंग से दूरी बनाना भी बेहद जरूरी है क्योंकि ये दोनों आदतें शरीर में फैट जमा करने और मेटाबॉलिज्म को खराब करने का काम करती हैं। इनसे बचकर ही लंबे समय तक स्वास्थ्य को सुरक्षित रखा जा सकता है।
निष्कर्ष
विसरल फैट शरीर के अंदर छिपी ऐसी चर्बी है जो कई गंभीर बीमारियों का कारण बन सकती है। इसे नजरअंदाज करना सही नहीं है। अच्छी डाइट, नियमित एक्सरसाइज, पर्याप्त नींद और तनाव कम करके इसे काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है।
समय-समय पर हेल्थ चेकअप करवाना और अपने स्वास्थ्य पर ध्यान देना भी जरूरी है। अचानक होने वाले मेडिकल खर्चों से बचने के लिए हेल्थ इंश्योरेंस लेना भी एक समझदारी भरा कदम हो सकता है। ऐसे समय में Niva Bupa Health Insurance Plans जैसी कंपनियां बेहतर हेल्थ कवरेज के विकल्प प्रदान करती हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. विसरल फैट क्या होता है?
विसरल फैट पेट के अंदर जमा होने वाली चर्बी होती है, जो लिवर और आंत जैसे अंगों के आसपास जमा होती है। ज्यादा बढ़ने पर यह कई बीमारियों का कारण बन सकती है।
2. क्या विसरल फैट खतरनाक होता है?
हाँ, ज्यादा विसरल फैट होने से डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट डिजीज और फैटी लिवर जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।
3. विसरल फैट कम करने के लिए क्या करना चाहिए?
नियमित एक्सरसाइज, हेल्दी डाइट, पर्याप्त नींद और तनाव कम करना विसरल फैट घटाने में मदद कर सकता है।
4. क्या पतले लोगों में भी वसायुक्त फैट हो सकता है?
हाँ, कई लोग बाहर से पतले दिखते हैं, लेकिन उनके पेट के अंदर वसा जमा हो सकती है। इसलिए सिर्फ वजन देखकर स्वास्थ्य का अंदाजा नहीं लगाना चाहिए।
5. विसरल फैट कम होने में कितना समय लगता है?
यह व्यक्ति की डाइट, एक्सरसाइज और लाइफस्टाइल पर निर्भर करता है। नियमित हेल्दी आदतें अपनाने से कुछ हफ्तों में फर्क दिखना शुरू हो सकता है।
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