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Intermittent Fasting in Hindi: इंटरमिटेंट फास्टिंग क्या होता है और कैसे करें?

22 May, 2026

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Intermittent Fasting in Hindi
Written by: Narender Singh

आजकल लोग अपनी सेहत और फिटनेस को लेकर पहले से कहीं ज़्यादा जागरूक हो गए हैं। वजन कम करना, ऊर्जा स्तर बढ़ाना और शरीर को स्वस्थ बनाए रखना हर किसी की प्राथमिकता है। इसी बीच एक नया ट्रेंड काफी लोकप्रिय हो रहा है, इंटरमिटेंट फास्टिंग। यह सिर्फ़ एक डाइट प्लान नहीं बल्कि जीवनशैली में बदलाव है, जिसमें खाने और उपवास के समय को संतुलित तरीके से तय किया जाता है। इसकी खासियत यह है कि इसे अपनाना आसान है और यह शरीर को प्राकृतिक रूप से डिटॉक्स करने में मदद करता है।

 

अगर आप सोच रहे हैं कि intermittent fasting in Hindi और बेहतर तरीके से कैसे समझा जाए, तो आप सही जगह आए हैं। इस गाइड में हम विस्तार से जानेंगे कि इंटरमिटेंट फास्टिंग क्या है, इसे कैसे किया जाता है और इसके क्या फायदे हो सकते हैं।

 

इंटरमिटेंट फास्टिंग क्या होता है?

इंटरमिटेंट फास्टिंग एक खान-पान की पद्धति है जिसमें खाने और उपवास (फास्टिंग) के समय को निश्चित किया जाता है। इसका ध्यान इस बात पर होता है कि आप कब भोजन कर रहे हैं, न कि केवल क्या खा रहे हैं।

 

सरल भाषा में समझें तो इंटरमिटेंट फास्टिंग का अर्थ है, दिन या हफ़्ते के कुछ हिस्से में भोजन न करना और बाकी समय में संतुलित, पौष्टिक भोजन करना। उदाहरण के लिए, 16 घंटे उपवास रखना और 8 घंटे के भीतर भोजन करना। इस प्रक्रिया से शरीर को पाचन से आराम मिलता है और वह अपनी प्राकृतिक क्रियाओं जैसे मरम्मत (repair) और सफाई (detox) को अधिक प्रभावी ढंग से कर पाता है।

 

इंटरमिटेंट फास्टिंग कैसे काम करता है?

जब आप कुछ घंटों तक खाना नहीं खाते हैं, तो शरीर पहले जमा हुई शुगर (ग्लाइकोजन) को इस्तेमाल करता है। उसके बाद शरीर ऊर्जा के लिए फैट को जलाना शुरू करता है। इसी प्रक्रिया को फैट बर्निंग कहा जाता है।

 

फास्टिंग के दौरान शरीर में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव होते हैं:

  • इंसुलिन लेवल कम होता है
  • ग्रोथ हार्मोन का स्तर बढ़ सकता है
  • सेल्स की रिपेयर प्रक्रिया तेज होती है
  • फैट स्टोर का इस्तेमाल बढ़ता है

 

इंटरमिटेंट फास्टिंग के प्रकार

इंटरमिटेंट फास्टिंग को अपनाने के कई तरीके हैं। हर व्यक्ति अपनी दिनचर्या और स्वास्थ्य के अनुसार इनमें से किसी भी पैटर्न को चुन सकता है। आइए विस्तार से समझते हैं इसके प्रमुख प्रकार:

 

16:8 मेथड

यह सबसे आसान और लोकप्रिय तरीका माना जाता है। इसमें आप दिन के 24 घंटों में से 16 घंटे उपवास रखते हैं और बाकी 8 घंटे के भीतर भोजन करते हैं। उदाहरण के लिए, रात 8 बजे खाना खाने के बाद अगला भोजन अगले दिन दोपहर 12 बजे किया जाता है। यह तरीका शुरुआती लोगों के लिए सबसे उपयुक्त है क्योंकि इसे लंबे समय तक आसानी से अपनाया जा सकता है।

 

5:2 तरीका

इसमें हफ़्ते के 5 दिन आप सामान्य भोजन करते हैं और बाकी 2 दिन बहुत कम कैलोरी वाला भोजन लेते हैं। इन दो दिनों में हल्का और पौष्टिक खाना जैसे फल, सब्ज़ियाँ और सूप लेना बेहतर होता है। यह तरीका उन लोगों के लिए अच्छा है जो पूरे हफ़्ते सख्त नियम नहीं अपनाना चाहते।

 

24 घंटे का फास्ट

इसमें हफ़्ते में 1 या 2 बार पूरे 24 घंटे का उपवास रखा जाता है। उदाहरण के लिए, अगर आप रात 8 बजे खाना खाते हैं तो अगला भोजन अगले दिन रात 8 बजे करेंगे। यह तरीका शरीर को गहराई से डिटॉक्स करने में मदद करता है, लेकिन इसे अपनाने से पहले धीरे-धीरे अभ्यास करना ज़रूरी है।

 

ऑल्टरनेट डे फास्टिंग

इसमें एक दिन सामान्य भोजन किया जाता है और अगले दिन बहुत कम या बिल्कुल भोजन नहीं किया जाता। यह तरीका थोड़ा चुनौतीपूर्ण हो सकता है, लेकिन लंबे समय में वजन घटाने और मेटाबॉलिज़्म सुधारने में प्रभावी माना जाता है।

 

इंटरमिटेंट फास्टिंग कैसे शुरू करें?

इंटरमिटेंट फास्टिंग को अपनाना आसान है, लेकिन सही तरीके से शुरुआत करना ज़रूरी है। धीरे-धीरे बदलाव करने से शरीर को आदत पड़ती है और लंबे समय तक इसे बनाए रखना आसान हो जाता है। आइए जानते हैं इसे शुरू करने के कुछ सरल और प्रभावी कदम:

 

धीरे-धीरे शुरुआत करें

शुरुआत में सीधे लंबे उपवास करने की बजाय छोटे समय से शुरुआत करें। आप 12 घंटे का फास्ट रख सकते हैं और फिर धीरे-धीरे इसे 14 घंटे और बाद में 16 घंटे तक बढ़ा सकते हैं। इस तरह शरीर को बिना दबाव दिए धीरे-धीरे नई आदत डालना आसान होता है।

 

खाने का समय तय करें

इंटरमिटेंट फास्टिंग में सबसे महत्वपूर्ण है खाने का समय तय करना। उदाहरण के लिए, सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक का समय चुनें और उसी अवधि में भोजन करें। निश्चित समय पर खाने से शरीर का बायोलॉजिकल क्लॉक संतुलित रहता है और पाचन तंत्र बेहतर काम करता है।

 

संतुलित भोजन लें

फास्टिंग के दौरान जो समय आपको खाने के लिए मिलता है, उसमें पोषण से भरपूर भोजन करना ज़रूरी है। इसमें फल, सब्ज़ियाँ, साबुत अनाज, प्रोटीन और हेल्दी फैट शामिल करें। जंक फूड या अत्यधिक तैलीय भोजन से बचें ताकि फास्टिंग का पूरा लाभ मिल सके।

 

पानी का सेवन बढ़ाएं

फास्टिंग के दौरान शरीर को हाइड्रेटेड रखना बहुत ज़रूरी है। पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं और चाहें तो नींबू पानी, ग्रीन टी या बिना शक्कर वाली ब्लैक कॉफी भी ले सकते हैं। इससे भूख कम महसूस होती है और शरीर की डिटॉक्स प्रक्रिया तेज़ होती है।

 

इंटरमिटेंट फास्टिंग के फायदे

इंटरमिटेंट फास्टिंग को अपनाने से शरीर को कई तरह के लाभ मिल सकते हैं। यह केवल वजन घटाने का तरीका नहीं बल्कि संपूर्ण स्वास्थ्य सुधार का एक प्राकृतिक उपाय है। आइए इसके प्रमुख फायदे विस्तार से समझते हैं:

 

वजन कम करने में मदद

फास्टिंग के दौरान शरीर का कैलोरी इनटेक कम हो जाता है। जब भोजन नहीं मिलता तो शरीर ऊर्जा के लिए जमा फैट को उपयोग करना शुरू करता है। इस प्रक्रिया से धीरे-धीरे वजन घटता है और शरीर अधिक फिट दिखाई देने लगता है।

 

मेटाबॉलिज़्म में सुधार

इंटरमिटेंट फास्टिंग शरीर की ऊर्जा का उपयोग करने की क्षमता को बेहतर बनाता है। नियमित उपवास से मेटाबॉलिज़्म तेज़ होता है, जिससे भोजन से प्राप्त पोषक तत्वों का सही तरीके से उपयोग होता है और शरीर अधिक सक्रिय महसूस करता है।

 

ब्लड शुगर कंट्रोल

फास्टिंग से इंसुलिन संवेदनशीलता बढ़ती है। इसका मतलब है कि शरीर शुगर को बेहतर तरीके से नियंत्रित कर पाता है। इससे ब्लड शुगर लेवल संतुलित रहता है और डायबिटीज़ जैसी समस्याओं का खतरा कम हो सकता है।

 

हार्ट हेल्थ के लिए फायदेमंद

इंटरमिटेंट फास्टिंग कोलेस्ट्रॉल और ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में मदद करता है। इससे हृदय रोगों का जोखिम कम होता है और दिल की सेहत लंबे समय तक बेहतर बनी रहती है।

 

दिमागी स्वास्थ्य में सुधार

कुछ शोध बताते हैं कि नियमित उपवास से दिमाग की कार्यक्षमता बेहतर होती है। यह स्मरण शक्ति को मजबूत करता है और मानसिक स्पष्टता (mental clarity) बढ़ाता है। लंबे समय में यह न्यूरोलॉजिकल बीमारियों से बचाव में भी सहायक हो सकता है।

 

इंटरमिटेंट फास्टिंग के दौरान क्या खाएं?

इंटरमिटेंट फास्टिंग करते समय सही भोजन का चुनाव करना बेहद ज़रूरी है। उपवास के बाद शरीर को पोषण और ऊर्जा की आवश्यकता होती है, इसलिए हेल्दी विकल्प चुनना और अस्वास्थ्यकर चीज़ों से बचना ही सबसे अच्छा तरीका है।

 

हेल्दी विकल्प चुनें

फास्टिंग के बाद भोजन करते समय ताज़े फल और सब्ज़ियाँ ज़रूर शामिल करें। ये विटामिन, मिनरल और फाइबर से भरपूर होते हैं, जो शरीर को हल्का रखते हैं और पाचन को आसान बनाते हैं। साथ ही प्रोटीन युक्त आहार जैसे दालें, पनीर, अंडे या चिकन मांसपेशियों को मज़बूती देते हैं और लंबे समय तक भूख नियंत्रित रखते हैं। साबुत अनाज जैसे ओट्स, ब्राउन राइस और मल्टीग्रेन रोटी धीरे-धीरे पचते हैं और लगातार ऊर्जा प्रदान करते हैं। इसके अलावा हेल्दी फैट जैसे बादाम, अखरोट, एवोकाडो और ऑलिव ऑयल दिल और दिमाग की सेहत के लिए लाभकारी होते हैं।

 

किन चीज़ों से बचें

फास्टिंग के दौरान अस्वास्थ्यकर भोजन से दूरी बनाना उतना ही महत्वपूर्ण है। जंक फूड शरीर में अतिरिक्त कैलोरी और अनावश्यक फैट बढ़ाता है, जिससे फास्टिंग का असर कम हो जाता है। बहुत ज़्यादा मीठा खाने से ब्लड शुगर अचानक बढ़ सकता है और ऊर्जा स्तर अस्थिर हो जाता है। प्रोसेस्ड फूड में मौजूद रसायन और संरक्षक शरीर पर नकारात्मक असर डालते हैं। वहीं अत्यधिक तेल वाला खाना पाचन को भारी बना देता है और वजन बढ़ाने का कारण बन सकता है। इसलिए उपवास के बाद हमेशा पौष्टिक और संतुलित भोजन को प्राथमिकता दें और अस्वास्थ्यकर विकल्पों से बचें।

 

संभावित नुकसान और साइड इफेक्ट्स

इंटरमिटेंट फास्टिंग के कई फायदे हैं, लेकिन शुरुआत में कुछ लोगों को हल्की-फुल्की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। यह सामान्य है, क्योंकि शरीर नई आदतों के अनुसार खुद को ढालने की कोशिश करता है।

 

  • कुछ लोगों को शुरुआत में सिरदर्द महसूस हो सकता है, क्योंकि लंबे समय तक भोजन न करने से ब्लड शुगर लेवल में बदलाव आता है और शरीर को ऊर्जा की कमी महसूस होती है।
  • फास्टिंग के शुरुआती दिनों में कमजोरी और थकान महसूस होना आम है, क्योंकि शरीर धीरे-धीरे जमा फैट को ऊर्जा में बदलने की प्रक्रिया सीख रहा होता है।
  • कई बार लंबे उपवास के कारण चक्कर आना या हल्की बेहोशी जैसी स्थिति भी हो सकती है, खासकर तब जब पानी का सेवन पर्याप्त न हो।
  • कुछ लोगों को लगातार भूख और ऊर्जा की कमी के कारण चिड़चिड़ापन महसूस हो सकता है, जिससे मूड स्विंग्स और ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई हो सकती है।

 

निष्कर्ष

अब जब आपको समझ आ गया है कि intermittent fasting in Hindi क्या है और इसे कैसे अपनाया जाता है, तो सबसे जरूरी है कि आप इसे समझदारी से शुरू करें। अपने शरीर की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए धीरे-धीरे इस लाइफस्टाइल को अपनाना बेहतर रहता है।

 

इंटरमिटेंट फास्टिंग कोई शॉर्टकट नहीं है, बल्कि एक संतुलित और अनुशासित तरीका है जो समय के साथ असर दिखाता है। सही खान-पान, नियमित दिनचर्या और पर्याप्त आराम के साथ इसे अपनाया जाए, तो यह आपकी सेहत को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है। साथ ही, ऐसे समय में जब आप अपने स्वास्थ्य पर ध्यान दे रहे हैं, नियमित हेल्थ चेकअप और अचानक होने वाले मेडिकल खर्चों के लिए तैयार रहना भी उतना ही जरूरी है। एक अच्छा health insurance प्लान इस स्थिति में आपकी आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित कर सकता है।

 

इसी तरह, Niva Bupa Health Insurance जैसे विकल्प आपको सही कवरेज चुनने में मदद कर सकते हैं, ताकि आप बिना किसी चिंता के अपनी सेहत और फिटनेस पर पूरा ध्यान दे सकें।

 

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1. Intermediate fasting kya hota hai?

यह एक खाने का तरीका है जिसमें कुछ समय तक उपवास रखा जाता है और बाकी समय में भोजन किया जाता है, ताकि शरीर बेहतर तरीके से ऊर्जा का उपयोग कर सके।

2. क्या इंटरमिटेंट फास्टिंग से वजन कम करना आसान होता है?

हाँ, सही तरीके से और संतुलित डाइट के साथ किया जाए तो यह वजन कम करने में मदद कर सकता है, क्योंकि इससे कैलोरी कंट्रोल में रहती है।

3. क्या फास्टिंग के दौरान कुछ पी सकते हैं?

फास्टिंग के समय पानी, ब्लैक कॉफी, ग्रीन टी या बिना शक्कर वाली चाय पी जा सकती है, जिससे शरीर हाइड्रेटेड रहता है।

4. इंटरमिटेंट फास्टिंग शुरू करने का सही समय क्या है?

आप इसे अपनी दिनचर्या के अनुसार कभी भी शुरू कर सकते हैं, लेकिन शुरुआत धीरे-धीरे करना और शरीर को समय देना जरूरी होता है।

5. क्या इंटरमिटेंट फास्टिंग लंबे समय तक सुरक्षित है?

अगर इसे सही तरीके से और संतुलित आहार के साथ किया जाए, तो यह लंबे समय तक सुरक्षित हो सकता है, लेकिन किसी भी स्वास्थ्य समस्या में डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर रहता है।

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